प्रामाणिक संदर्भ: Dhp 111 सत्यापित मूल स्रोत

“भले ही कोई व्यक्ति बिना प्रज्ञा और बिना आत्म-संयम के सौ वर्ष तक जिए, उसकी तुलना में प्रज्ञावान होकर और ध्यानमयी सजगता के साथ जिया गया एक ही दिन अत्यंत श्रेष्ठ है।”

मूल पालि गाथा: Yo ca vassasataṃ jīve, duppañño asamāhito; Ekāhaṃ jīvitaṃ seyyo, paññavantassa jhāyino.

— तथागत गौतम बुद्ध
शाक्यमुनि बुद्ध, धम्म के संस्थापक
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संदर्भ:

Pali Canon: Dhammapada 8.111 prioritizing the depth, wisdom, and moral quality of life over mere numerical longevity.