“जैसे खराब छप्पर वाले घर में वर्षा का पानी टपक पड़ता है, वैसे ही असंयमित और अशिक्षित मन में वासनाएँ प्रवेश कर जाती हैं। और जैसे अच्छे छप्पर वाले घर में पानी नहीं टपकता, वैसे ही सुसंस्कृत मन में विकार प्रवेश नहीं कर पाते।”
मूल पालि गाथा: Yathā agāraṃ ducchannaṃ, vuṭṭhī samativijjhati; Evaṃ abhāvitaṃ cittaṃ, rāgo samativijjhati.
— तथागत गौतम बुद्ध
शाक्यमुनि बुद्ध, धम्म के संस्थापक
Pali Canon: Dhammapada 1.13-14 on guarding and training the mind through meditation and mindfulness.