प्रामाणिक संदर्भ: Dhp 254 सत्यापित मूल स्रोत

“आकाश में कोई पदचिह्न नहीं होता, और सच्चा साधक अपनी मुक्ति के लिए बाहर नहीं बल्कि अपने भीतर देखता है। संसार सांसारिक बंधनों में आनंद लेता है, जबकि तथागत सभी बंधनों से मुक्त होते हैं।”

मूल पालि गाथा: Ākāse padaṃ natthi, samaṇo natthi bāhire; Papañcābhiratā pajā, nippapañcā tathāgatā.

— तथागत गौतम बुद्ध
शाक्यमुनि बुद्ध, धम्म के संस्थापक
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संदर्भ:

Pali Canon: Dhammapada 18.254 on internal self-realization versus external rituals.