“मन सभी मानसिक अवस्थाओं का प्रधान है, मन ही श्रेष्ठ है और वे सब मन से ही उत्पन्न होते हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रसन्न व शुद्ध मन से बोलता या कार्य करता है, तो सुख उसकी कभी न बिछड़ने वाली छाया की तरह उसके पीछे चलता है।”
— तथागत गौतम बुद्ध
शाक्यमुनि बुद्ध, धम्म के संस्थापक
Pali Canon: Dhammapada 1.2 (Manopubbaṅgamā dhammā manoseṭṭhā manomayā...).