प्रामाणिक संदर्भ: Dhp 315 सत्यापित मूल स्रोत

“जिस प्रकार सीमा पर स्थित नगर की भीतर और बाहर से भली-भांति रक्षा की जाती है, उसी प्रकार तुम्हें भी अपने मन की रक्षा करनी चाहिए। इस बहुमूल्य अवसर को अपने हाथ से व्यर्थ न जाने दो।”

मूल पालि गाथा: Nagaraṃ yathā paccantaṃ, guttaṃ santarabāhiraṃ; Evaṃ gopetha attānaṃ, khaṇo vo mā upaccagā.

— तथागत गौतम बुद्ध
शाक्यमुनि बुद्ध, धम्म के संस्थापक
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संदर्भ:

Pali Canon: Dhammapada 22.315 emphasizing constant self-guarding and taking advantage of the rare opportunity of conscious human existence.