प्रामाणिक संदर्भ: Dhp 78 सत्यापित मूल स्रोत

“दुष्ट और अनैतिक मित्रों की संगति मत करो, न ही नीच विचार वालों के साथ रहो। सदाचारी और कल्याणकारी मित्रों की संगति करो, और श्रेष्ठ व्यक्तियों के साथ रहो।”

मूल पालि गाथा: Na bhaje pāpake mitte, na bhaje purisādhame; Bhajetha mitte kalyāṇe, bhajetha purisuttame.

— तथागत गौतम बुद्ध
शाक्यमुनि बुद्ध, धम्म के संस्थापक
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संदर्भ:

Pali Canon: Dhammapada 6.78 on the spiritual importance of Kalyana-mittata (noble friendship).