“सामाजिक मुक्ति के संघर्ष में विचार और सत्य ही सबसे अचूक हथियार हैं। मूक और शोषित जनता की चेतना को जगाना ही सभी वास्तविक क्रांतियों की शुरुआत है।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Published in the inaugural editorial of Mooknayak on 31 January 1920, launching Dr. Ambedkar's public crusade for voice and representation for marginalized communities.