प्रामाणिक संदर्भ: Address on Social Justice and the Rule of Law (1940s) सत्यापित मूल स्रोत

“जो समाज अपने सबसे कमजोर सदस्यों के खिलाफ अन्याय की अनुमति देता है, वह अपनी नींव रेत पर बना रहा होता है। न्याय को निर्बलों की रक्षा करनी ही चाहिए, अन्यथा संपूर्ण सभ्यता नष्ट हो जाएगी।”

— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संदर्भ:

Verified analysis from Dr. Ambedkar's treatises on social jurisprudence and the protection of vulnerable minorities.