“मेरे सामाजिक दर्शन को तीन शब्दों में संजोया जा सकता है: स्वतंत्रता, समता और बंधुता। लेकिन कोई यह न कहे कि मैंने अपना यह दर्शन फ्रांसीसी क्रांति से लिया है। मैंने इसे वहाँ से नहीं लिया। मेरा यह दर्शन तथागत बुद्ध की शिक्षाओं में निहित है।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Broadcast on All India Radio, Delhi on 3 October 1954, clarifying the Buddhist and ethical roots of his social philosophy.