“आत्मसम्मान (स्वाभिमान) जीवन की सबसे अमूल्य संपत्ति है। इसके बिना मनुष्य शून्य के समान है। आत्मसम्मान के साथ जीने के लिए व्यक्ति को सभी कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Published in Bahishkrit Bharat (1927), inspiring the depressed classes to awaken their self-respect and reject humiliating social subjection.