“हमें अपने राजनीतिक लोकतंत्र को एक सामाजिक लोकतंत्र भी बनाना होगा। राजनीतिक लोकतंत्र तब तक जीवित नहीं रह सकता जब तक कि उसके आधार में सामाजिक लोकतंत्र न हो, जो स्वतंत्रता, समता और बंधुता को जीवन के मूल सिद्धांतों के रूप में स्वीकार करता है।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Delivered on 25 November 1949 in the Constituent Assembly of India, presenting the final draft of the Constitution.