“बदलती हुई दुनिया में अपरिवर्तनशील नैतिकता समाज को पतन और जड़ता की ओर ले जाती है। नैतिकता और सामाजिक नियमों को मानवीय न्याय और गरिमा की बढ़ती मांगों के अनुरूप विकसित होना चाहिए।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Verified treatise in Philosophy of Hinduism advocating for dynamic moral philosophy over static scriptural dogmatism.