“यह नहीं भूलना चाहिए कि बुद्धिमत्ता एक दुर्लभ वस्तु है। किसी भी अन्य सामाजिक पूंजी की तरह, इसका संवर्धन ही समाज का ध्येय होना चाहिए।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Verified excerpt from Dr. B. R. Ambedkar's philosophical reflections on intellectual development and the democratization of higher learning.