“लोकतंत्र केवल कानूनों की सरकार नहीं है; यह अपने साथी नागरिकों के प्रति सम्मान और समानता का एक दृष्टिकोण है। अन्याय के प्रति उदासीनता किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए धीमे जहर के समान है।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Delivered during discussions on the moral prerequisites for parliamentary democracy in India.