“बंधुता का अर्थ है सभी भारतीयों के बीच एक साझा भ्रातृत्व की भावना — यह भावना कि सभी भारतीय एक ही जनसमुदाय हैं। बंधुता के बिना, समता और स्वतंत्रता केवल ऊपरी रंग-रोगन से अधिक कुछ नहीं होंगी।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Delivered on 25 November 1949 in the Constituent Assembly, explaining why the trinity of liberty, equality, and fraternity cannot be divorced from one another.