“समानता भले ही एक कल्पना हो, फिर भी इसे एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना ही चाहिए।”
— डॉ. बी. आर. आंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक
Original text in Annihilation of Caste (1936), Section XIV explaining the necessity of democratic equality in governance.